This celebration encourages us to generate profound connections with our internal selves, which encourages spiritual progress and peace. This holy period reminds us that the core of devotion may be the purity of our hearts plus the sincerity of our prayers.
* हर रोज कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी होती हो तो काली इस तरह की घटनाएं भी रोक देती हैं।
नोट : उपरोक्त में से किसी एक मंत्र का ही प्रयोग करें।
जीवन में आने वाले संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
लगा दें इसे, मिटेगा कष्ट-क्लेश, आएगी बरकत!
इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.
डॉ. कुणाल कुमार झा ने बताया कि इस नवरात्रि में साधक लोग पूरे विश्व के भले के लिए साधना करेंगे, जिससे अच्छा फल मिले. यह नवरात्रि तंत्र साधकों के लिए खास मानी जाती है, जो अपनी तंत्र साधना को दूसरों से छिपाकर करते हैं.
घट (कलश) स्थापना नवरात्रि पूजा का प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। यह शुभता, ऊर्जा, और देवी दुर्गा की उपस्थिति का प्रतीक है।
The Goddess' blessings provide prosperity in the form of wealth and grains in the house, along with monetary prosperity. At the same time, individuals trying to get spiritual knowledge would locate adoring the Goddess throughout Gupt Navratri to be exceedingly auspicious. Should you worship in the course of Gupt Navratri for spiritual upliftment, you might have mystical experiences.
* लंबे समय से चली आ रही बीमारी दूर हो जाती हैं।
देवी की कृपा से जीवन से नकारात्मक ऊर्जाओं here का नाश होता है।
देवी पूजन की सभी सामग्री को एकत्रित करें। पूजा की थाल सजाएं।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
पूजा आरंभ करें: दीपक जलाकर देवी का आवाहन करें।
यह समय साधक को आत्म-चिंतन और आत्म-साक्षात्कार का अवसर देता है। ध्यान और तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।